Saturday, 7 December 2013

अभिमन्यु या भीम






6 फरवरी 2003 का दिन था दिल्ली में देश के उद्योगपतियों कि सबसे बड़ी संस्था CII ( i.eConfederation of Indian Industry ) ने नई दिल्ली में एक खास अधिवेशन रखा था जिसे उन्होंने नाम दिया था ‘’ नरेंद्र मोदी ,गुजरात के नए मुख्यमंत्री के साथ एक मुलाकात ‘’ और मोदी जी कोमुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था
नरेंद्र मोदी करीब एक साल पहले भारी बहुमत से जीते थे गुजरात में , उन्होंने तुरंत इसे स्वीकार किया क्योंकि गुजरात ने उस समय दो भयंकर हादसे झेले थे भूकंप और दंगो के रूप में और मोदी चाहते थे कि मेरा गुजरात जल्द से जल्द इनसे बाहर निकले और विकास कि नई ऊचाइयों को छुए

मोदी दिल्ली आये इस उम्मीद में कि गुजरात को नई उचाईयों पर पहुंचाने के लिए वे उद्योगपतियों के साथ गम्भीर विचार-विमर्श करेंगे ,नई-२ योजनायें बनाएंगे कि कैसे गुजरात को देश का नम्बर वन राज्य बनाया जाए ,कैसे वहाँ उद्योगों-नौकरियों में वृद्धि कि जाए जिससे कि गुजरात से बेरोजगारी जड़ से समाप्त हो लेकिन उन्हें क्या मालुम था कि ये उन्हें नोचने के लिए तथाकथित सेकुलर भेड़ियों द्वारा बिछाया गया एक जाल था इसमें विकास ,उद्योग ,रोजगार आदि कि वैसी कोई बात नहीं होनी थी जिसके लिए मोदी जी को निमंत्रण दिया गया था बल्कि इसमें 2002 के दंगों को जिक्र करके मोदी जी को अपमानित करने का प्रयास था लेकिन वे भेडिये जानते नहीं थे कि जिसे वे गीदड समझकर शिकार करने कि सोच रहे थे वो माँ भारती का शेर था जिससे पंगा लेने पर उन्हें लेने के देने पड़ जायेंगे

खैर मोदी दिल्ली आये और उस अधिवेशन में गए , वहाँ पर गुजरात को आगे ले जाने कि जगह पीछे ले जाने का सिलसिला शुरू हुआ ,एक के बाद एक नरेंद्र मोदी के सामने उद्योगपतियों कि खाल में छुपे हुए सेकुलर भेडिये बार-२ दंगों का जिक्र करके एवं अपनी लच्छेदार बातें करके मोदी पर indirectly निशाना साधते रहे और मोदी चुपचाप सुनते रहे

दीपक पारेख ( जो कि उस समय HDFC Bank के CEO थे ) ने कहा कि –
‘’ गुजरात में हुए दंगों से भारत ने अपना सेकुलर चेहरा खो दिया और मुझे बेहद शर्म आती है जो कुछ भी गुजरात में हुआ उस पर ‘’

वैसे गौर करने वाली बात ये है कि जब कश्मीर में 5 लाख हिंदुओं का नरसंहार किया गया और उन्हें घाटी से बाहर निकाल दिया गया तब पारेख साहब या किसी और मैकाले-पुत्र को उस पर शर्म नहीं आई और ना ही भारत के सेकुलरिस्म के खोने कि चिंता हुई, जब 1984 के दंगों में लाखों निर्दोष सिखों को मौत के घाट उतारा गया तब भी पारेख साहब या किसी और महोदय को शर्म नहीं आई और ना ही कोई चिंता हुई ,भई आखिर हो भी क्यों ये सेकुलरिस्म कि घुट्टी तो हमेशा हिंदुओं को ही पिलाई जाती है क्योंकि अपनी माँ का अपमान करके दुसरे कि माँ का सम्मान करने को ही तो आज सेकुलरिस्म बना दिया गया है और उसी दोगले सेकुलरिस्म के खोने कि चिंता पारेख साहब जैसे पढे-लिखे और ऊंची सोच वाले हिंदुओं को सताती रहती है

हमारे राहुल बजाज जी तो एक तरह से अघोषित मुखिया बने हुए थे तथाकथित सेकुलर भेड़ियों कि उस टीम का , उन्होंने अपने भाषण कि शुरुआत कि ये कहते हुए कि 2002 तो एक ऐसा साल रहा गुजरात के लिए जिसमें उसने अपना काफी कुछ गंवा डाला ,फिर उन्होंने मोदी कि तरफ देखते हुए कहा -
‘’ क्यों कश्मीर में उद्योग-धंधे नहीं आते हैं ,क्यों उत्तर-पूर्वी राज्यों में उद्योग-धंधे नहीं आते हैं ,क्यों बिहार और उत्तर-प्रदेश जैसे राज्यों में उद्योग-धंधे कम हैं ,माना कि इसका कारण वहाँ पर जरूरी साधनों कि कमी होना है लेकिन उसके साथ-२ एक बहुत बड़ा कारण असुरक्षा और कानून के पालन कि भारी कमी भी है जो कि वहाँ पर उद्योग-धंधे लगने से रोकती है , और यही सब पिछले साल तुम्हारे यहाँ गुजरात में हुआ , उम्मीद करता हूँ कि जो हुआ वो तुम दौबारा नहीं होने दोगे लेकिन फिर भी यहाँ मौजूद हम सब ये जानना चाहते हैं कि तुम किन चीजों में यकीन रखते हो ,तुम्हारी विचारधारा क्या है ,तुम्हारी मानसिकता क्या है क्योंकि नेतृत्व बहुत महत्वपूर्ण होता है और आज गुजरात का नेतृत्व तुम्हारे हाथ में है और इसलिए हम तुम्हें और ज्यादा जानना चाहते हैं, माना कि अपने उद्योग आदि कि मजबूरी के चलते हमें हर प्रकार कि विचारधारा वाले लोगों के साथ काम करना पड़ता है लेकिन हमारे भी कुछ उसूल हैं और हमारा भी एक दृष्टिकोण है कि हमारे समाज के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा ‘’

कुछ भेड़ियों के द्वारा बहुत सी बातें तो ऐसी कही गयीं जिन्हें सुनकर मोदी कि आँखों में खून उतर आया था और उनकी आँखों से अंगारें बरस रहे थे लेकिन फिर भी उन्होनें अपना धैर्य नहीं खोया और वे शान्ति से चुपचाप इन सब बातों और उनमें छुपे हुए तानों को सुनते रहे और अपमान का घूँट पीतेरहे ,कहाँ वे इस बात कि चर्चा करने आये थे कि कैसे गुजरात में विकास कि गंगा बहाकर उसे बुलंदियों पर ले जाया जाए और कहाँ ये लोग फिर से जख्मों पर नमक छिड़ककर उन्हें हरा करने पे तुले हुए थे

अंत में जब बोलने कि बारी नरेंद्र मोदी कि आई तो उन्होंने राहुल बजाज कि तरफ देखकर और उनकी आँखों में आँखें डालकर बोलना शुरू किया -
‘’ तुम और तुम्हारे दोगले सेकुलर दोस्त किसी भी समय गुजरात में आकर देख सकते हैं कि सत्य क्या है ,हमेशा अख़बारों में लिखी गयी बात या टी.वी पे दिखाई गयी खबर ही सच नहीं होती है ‘’

मीटिंग में मौजूद हर उद्योगपति सन्न रह गया मोदी कि राहुल बजाज पर कि गई इस बेबाक और दहाड़ती हुई टिप्पणी पर ,उन्हें मोदी से इस आक्रमक अंदाज कि उम्मीद नहीं थी क्योंकि वे सोच रहे थे कि हमारे बनाए गए दबाव के आगे ये योद्धा झुक जाएगा और आत्म-समर्पण कर देगा लेकिन ये शूरवीर तो उन्हें आगे बढकर चुनौती दे रहा था

मोदी गरजते हुए आगे बोले -

‘’ तुम्हें जवाब चाहिए ना तो आओ गुजरात में और बात करो लोगों से कि क्या उन्हें गुजरात असुरक्षित लगता है या पहले से ज्यादा सुरक्षित लगता है ,एक बात ध्यान रखना कि जो गुजरात सारे देश और दुनिया को अहिंसा का संदेश देने वाले महात्मा गांधी दे सकता है तो जरूरत पड़ने पर वही गुजरात सरदार पटेल को पैदा करना भी जानता है ''

सारा हॉल तेज धड़कन और ख़ामोशी से मोदी को सुन रहा था ,मोदी आगे बोले -

'' ऐसे बहुत से लोगों को मैं जानता हूँ जिन्हें कि मुझे और गुजरात को बदनाम करने के ढेरों पैसे मिलते हैं मेरे राजनीतिक दुश्मनों से लेकिन तुम उद्योगपतियों के पास तो पैसे कि भी कमी नहीं है फिर उसके बावजूद भी तुम लोगों को क्या मिलता है गुजरात को बदनाम करके ये मेरी समझ से बाहर है ‘’

सारी मीटिंग में सन्नाटा छा गया था मोदी के इस Angry Young Man रूप को देखकर , जिसे वे सब अभिमन्यु समझकर मारने के लिए दौड़े थे वो अभिमन्यु नहीं भीम निकल गया था जिसकी गर्जना सुनकर बड़े-बड़ों के होश गुम हो गए थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या बोलें
मोदी के इस प्रचंड रूप को देखकर राहुल बजाज और अन्यों को अहसास हुआ अपने थोथे सेकुलरिस्म के ढोल का और उन्होनें बात सम्भालने कि कोशिश कि ,मोदी के भाषण के बाद राहुल बजाज ने कहा कि -

‘’ हमारे विचार भले ही अलग-२ हों लेकिन इसी को लोकतंत्र कहते हैं , हमनें आपको जो भी कहा वो आपसे कोई निजी दुश्मनी के कारण नहीं कहा और ना ही हमारा मतलब आपको गुनहगार ठहराना या ठेस पहुंचाना था ,हम सब बस अपने मन में मौजूद कुछ चिंताएं व्यक्त कर रहे थे लेकिन फिर भी जो हो चुका उसे लेकर रोते रहने से किसी को कोई फायदा नहीं होना है हम सबको सुनहरे भविष्य के लिए आगे कि ओर देखना चाहिए और मैं सच कहता हूँ आपकी कुछ बातों से मैं बेहद प्रभावित हुआ हूँ ‘’

लेकिन तीर कमान से निकल चुका था ,औपचारिकताएं खत्म होते ही मोदी एक पल के लिए भी उस बैठक में नहीं रुके और बिना किसी से बात किये वहाँ से चले गए

जब इस सारी घटना का गुजरात के उद्योगपतियों को पता लगा तो उनमें गुस्से कि लहर फ़ैल गई ,अपने मुख्यमंत्री के दिल्ली में हुए इस भारी अपमान पर गुजरात के उद्योगपतियों गौतम अदानी,करसन पटेल ,इन्द्रवर्धन मोदी ,चिंतन पारेख ,अनिल बेकरी आदि ने तुरंत अपनी खुद कि एक संस्था का गठन किया RGG (Resergent Group of Gujarat ) के नाम से और उन्होनें CII को पत्र लिखा कि उनकी मीटिंग में गुजरात के यशस्वी मुख्यमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी का जो अपमान किया गया उससे गुजराती अस्मिता को गहरी ठेस पहुंची है और मोदी का अपमान गुजरात के प्रत्येक नागरिकका अपमान है ,इसलिए या तो CII इसके लिए मोदी से माफ़ी मांगें या फिर गुजरात के सभी उद्योगपति बिना किसी देरी के CII से त्यागपत्र दे देंगे

इतना ही नहीं CII में शामिल गुजरात कि 100 से ज्यादा कम्पनियों ने भी मोदी से माफ़ी ना मांगने पर CII छोड़ने का और उसका बहिष्कार करने ऐलान कर दिया

अब तो CII और उनमें मौजूद तथाकथित सेकुलर भेड़ियों के होश उड़ गए ,जो गड्ढा उन्होंने मोदी जी के लिए खोदा था उसमें वे खुद फंस गए थे ,मोदी ने उनके बिछाए चक्रव्यूह को बुरी तरह से तोड़ डाला था और उन्हें घुटनों के बल लाकर खड़ा कर दिया था

उस समय के CII के Director तरुण दास ने मोदी जी से मिलने कि कोशिश कि लेकिन मोदी ने मिलने से इनकार कर दिया ,फिर वो उस समय के कानून मंत्री और मोदी जी के खास दोस्तों में से एक अरुण जेटली के पास गए और उनसे प्रार्थना कि की मोदी जी को मनाएं ,हम उनसे मिलना चाहते हैं और दिल्ली के अपने व्यवहार पर शर्मिंदा हैं

जेटली ने कुछ दिनों बाद नरेंद्र मोदी के साथ तरुण दास कि मीटिंग करवा दी ,तरुण दास ने मोदी से कहा कि -

‘’ हम CII के सभी सदस्य 6 फरवरी 2003 को आपके साथ दिल्ली में जो कुछ भी हुआ उसके लिए काफी शर्मिंदा हैं और बिना किसी हिचक के आपसे अपने व्यवहार के लिए क्षमा मांगते हैं ,हमारा मकसद कभी भी आपको दुःख पहुंचाना या आपका अपमान करना नहीं था ,मेरी आपसे प्रार्थना है कि जो कुछ भी हुआ उसे भूल जाएँ और गुजरात और CII के सम्बन्धों को पहले से भी अधिक मजबूती प्रदान करें ‘’

मोदी ने भी इसका स्वागत किया और कहा कि पहले जो कुछ भी हुआ हमें उसे दफनाकर एक नई शुरुआत करनी चाहिए

एक कहावत है कि अपने घर में तो कुत्ता भी शेर होता है लेकिन मोदी ने दिखा दिया था कि शेर जहाँ जाता है उसका घर वही होता है

इसके बाद मोदी जी के विरोधियों ने ये दुष्प्रचार शुरू कर दिया मोदी जी के खिलाफ कि नरेंद्र मोदी पारसी समाज के विरोधी हैं क्योंकि उस मीटिंग में मोदी जी पर सबसे अधिक निशाना साधने वाले राहुल बजाज और जमशेद जी गोदरेज पारसी समाज के थे लेकिन मोदी ने ऐसा दुष्प्रचार करने वाले सभी देशद्रोहियों के मुंह पर करारा तमाचा मारा अपनी एक Vibrant Gujarat Summit के Function में उस समय के प्रधानमंत्री माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के हाथों से एक पारसी उद्योगपति रतन टाटा को पुरूस्कार दिलवाकर

ये तो बस 1 घटना है नरेंद्र मोदी के जीवन से जुडी हुई ,ऐसी ना जाने कितनी घटनाएं हैं जिन्हें कि मोदी-विरोधी गलत रूप में आम जनता के सामने प्रस्तुत करते हैं जबकि सत्य क्या है उसे कोई नही दिखाना चाहता ,मेरी तो इच्छा है कि नरेंद्र मोदी के रहस्यमयी जीवन और उनकी रहस्यमयी शख्सियत पर सभी घटनाओं को समेटते हुए एक किताब लिखी जानी चाहिए ताकि हम सब उनसे सीख सकें...

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