‘’
ये जो सेना का जवान होता है ये युद्ध कि भूमि में
मरने के लिए जाता है , क्या
सिर्फ इसलिए कि उसको तनख्वाह मिलती है ??...........................उसको
तनख्वाह मिलती है सिर्फ इसलिए वो सेना का जवान युद्ध कि भूमि में मरने के लिए तैयार
नहीं होता है ..........................वो
मरने के लिए इसलिए तैयार होता है क्योंकि इस मिटटी से वो प्यार करता है ...................अगर
आप भी अपने जीवन में किसी चीज से प्यार करो जैसे कि मैं आपको एक उदहारण देता हूँ
आम तौर पर महिलाओं का स्वभाव कैसा होता है (
वैसे अगर मैं गलती करूँ तो सब माताएं-बहनें
मुझे क्षमां करें क्योंकि मेरा नाता उनसे जरा कम है तो इसलिए मेरा विश्लेषण गलत भी
हो सकता है ......... :) :) :) ) .....................लेकिन
आम तौर पर महिलाएं क्या करती हैं ,घर
में अगर वो खाना पका रही हैं ,चपाती
बना रही हैं तो चाहती हैं कि अपने पतिदेव को गोल-२
फूली हुई और अच्छी चपाती बनाकर दें
अब जब वो खाना पका रही है और तैयारी कर रही है
तो इतने में ही कहीं से एक-आध
चपाती में से भाप निकल आती है ,
Steam निकल आती है जिसकी वजह से उसकी
ऊँगली थोड़ी सी जल जाती है .............................तो
वो क्या करती है कुछ दवाई वगैरह लगाती है.............................
लेकिन हर पल बार-२
ये देखती है कि दरवाजे कि घंटी कब बजेगी .......................वो
इन्तेजार करती है कि पतिदेव आयें ...............और
ये चाहती है कि पतिदेव आकर उसकी इस ऊँगली कि जलन को महसूस करें ,
feel करें ...................(
और अगर बच्चे देखते ना हों तो एक फूंक भी लगा दें ........... :) :) :) ) .........................चाहती
है ना ........................मैं
गलत होऊं तो मुझे क्षमां करना .....................लेकिन
उसका मन करता है कि इस चपाती को बनाते हुए अगर वो जली है तो उसकी उस जलन को नोटिस किया
जाए
लेकिन वो ही माँ वो ही महिला .................बाजार
में सब्जी लेने गयी ......................................साडी
का स्टाल लगा है.............................डिस्काउंट
20% है
.............तो
क्या होगा...............................सब्जी
बाजू में और साडी कि दूकान पे जायेगी ........................दूकान
में बढ़िया-२ साडी रखी है ........................20%
डिस्काउंट है ...................उसका
मन कर रहा है कि ये वाली साडी लूं ,वो
वाली साडी लूं , ये वाली लूँ ,वो
वाली लूँ और इतने में ही अचानक खबर आती है कि उसके मोहल्ले में आग लग गयी है ............................वो
तुरंत वहाँ से भागती है .........साडी
,पैसे ,सम्पति
आदि जो भी हो वो सबकुछ छोड़कर के दौड़ती है ..........................और
जाकर के देखती है कि उसका अपना घर जल रहा है...............वो
चीखती है,चिल्लाती है ..........................बड़े-२
तन्दुरस्त लोग ,बहादुर
लोग आग को बुझाने के लिए पानी डाल रहे हैं ...............................और
ये जाकर के चीखती है कि अरे मेरा बेटा मकान के अंदर रह गया है ..........................अरे
मेरा बेटा मकान के अंदर रह गया है ........................ये
सुनकर सारे तथाकथित मर्द लोग एक दुसरे का मुंह देखते हैं ,
इन्तेजार करते हैं कि कौन अंदर जाए ..............................और
तब ........................तब
जाकर के वो माँ उस जलते हुए मकान में कूद पड़ती है और बच्चे को लेकर के आती है
छोटी सी भाप के कारण जिसकी ऊँगली पे हल्की सी जलन
होने पर भी जो माँ पचास बार फूंक लगा रही थी वही माँ पूरे के पूरे जलते हुए मकान में
बिना किसी जलन कि परवाह किये बिना कूद पड़ी क्यों क्योंकि उस माता के भीतर शक्ति का
रूप होता है मित्रों जब बेटा होता है तो कूद पड़ती है
अभय यहीं से पैदा होता है ..........................निर्भय
यहीं से पैदा होता है
मुझे याद है मैं 1992 में
कश्मीर के श्रीनगर गया था लाल चौक पे तिरंगा झंडा फहराने के लिए और उस समय वहाँ आतंकवाद
पूरे जोर पे था ........................आतंकवादी
हिंदुस्तान के तिरंगे झंडे को जमीन पे रौंदते थे ,
उसको जलाते थे ,उसको
अपमानित करते थे ..............तिरंगे
झंडे से अपनी कार साफ़ कर रहे हैं ,अपने
जूते साफ़ कर रहे हैं और कैमरे के सामने सब करते थे और ये दृश्य मेरे दिल में आग पैदा
करते थे
तो हमने एक यात्रा निकाली थी कन्याकुमारी से लेकर
कश्मीर तक कि और तय किया था कि हम 26 January को श्रीनगर के लाल चौक पे 11 बजे
जाकर के तिरंगा झंडा फहराएंगे और हम तिरंगा झंडा लेकर के निकल पड़े .............जब
आतंकवादियों को इसका पता लगा तो उन्होंने श्रीनगर में जगह-२
बड़े-२ पोस्टर चिपका दिए जिन पर
कि लिखा था कि – ‘’ किसने
अपनी माँ का दूध पिया है जो कि 26 January को
11 बजे श्रीनगर के लाल चौक पर आकर के तिरंगा झंडा
फहराके जिन्दा वापिस जाए ‘’
जब मैं अपनी यात्रा कन्याकुमारी से शुरू करके और
भारत के ओर दुसरे हिस्सों से होते हुए हैदराबाद तक पहुंचा तो वहाँ मुझे इस बात कि खबर
लगी कि आतंकवादियों ने ऐसा-२
कहा है
और तब...................................
मैंने अपनी हैदराबाद कि सभा में ललकार दिया था और अगर
उस समय कि विडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध हो तो आप देख भी सकते हैं कि मैंने कहा था कि –
‘’ मैं 26 January कि सुबह ठीक 11 बजे
श्रीनगर के लाल चौक पे पहुंचूंगा ....................मैं
बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर के नहीं आऊंगा .........................मैं
बुलेटप्रूफ गाडी में नहीं आऊंगा ..................मेरे
हाथ में और सीने पे सिर्फ तिरंगा झंडा होगा...............................
और फैसला 26 January
को
ही ठीक 11 बजे श्रीनगर के लाल चौक पे ही होगा कि किसने अपनी
माँ का दूध पिया है ‘’
और मित्रों मैं समय पे गया और तिरंगा झंडा फहराया
और आज भी आपके सामने खड़ा हूँ ..........ये
कोई मैं आतंकवादियों से सिर्फ आज से नहीं लड़ रहा हूँ दोस्तों .........बड़े
लम्बे समय से लड़ रहा हूँ
मोदी जी कि इस पूरी Speech कि विडियो यहाँ देखें –

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