Sunday, 8 December 2013

नरेंद्र मोदी का कवि रूप





चेतन शर्मा –
नमस्कार ,मैं हूँ चेतन शर्मा
इनसे आप या तो करते हैं गिला या फिर प्यार
इन पर हैं आरोप बेशुमार ,कभी भेद-भाव कभी अत्याचार
लेकिन इनकी सफलता से कोई नहीं कर सकता इनकार
फिर चाहे वो उद्योगपति हो या साहूकार
गुजरात से हटा भ्रष्टाचार ,हुए आविष्कार
सालों से चलाते आये हैं ये गुजरात कि सरकार
तो आइये सुनते हैं नरेंद्र मोदी के विचार

नमस्कार मोदी जी

नरेंद्र मोदी
 
नमस्कार भैया , आप बड़े कवि कि तरह बोल रहे थे

चेतन शर्मा –
आपसे ही प्रेरणा ली है ,मोदी जी सफलता शब्द का जब नाम आता है ,सफल मुख्यमंत्री कि जब सूचि बनती है तो उसमें हर बार आपका नाम सबसे प्रथम होता है ,आप मानते हैं इस बात को

नरेंद्र मोदी –
जब इंसान अपने आप को सफल मानने लग जाता है तो उसकी विकास यात्रा रुक जाती है क्योंकि उसको लगता है कि अब बहुत कुछ हो गया ,अब कुछ नहीं भी करेंगे तो भी चलेगा लेकिन मैं ऐसी सोच का व्यक्ति नहीं हूँ इसलिए चाहे मेरी आलोचना हो या तारीफ़ हो मैं इन चीजों के तराजू से जिंदगी का मूल्यांकन करता ही नहीं हूँ


चेतन शर्मा –
लेकिन जिंदगी जब चलती है तो कुछ पड़ाव आते हैं ,कुछ लक्ष्य होते हैं और उन लक्ष्यों कि पूर्ति जब होती है तो वो उस व्यक्ति कि सफलता ही तो कही जायेगी

नरेंद्र मोदी –
इसलिए तो मैं कहता हूँ कि मैं खुद इसका फैसला नहीं करता, इसका फैसला कोई और करे कि वो विफलता है या सफलता है क्योंकि अगर मैं खुद इसका मूल्यांकन करने बैठ जाऊँगा तो मैं रुक जाऊँगा ,अटक जाऊँगा

चेतन शर्मा –
नरेंद्र मोदी ,ये नाम जब एक आम आदमी के सामने आता है तो इस नाम से जुडी तरह-२ कि छवियाँ आती हैं उसके सामने जैसे एक ईमानदार व्यक्ति ,एक कार्यकुशल व्यक्ति ,एक भ्रष्टाचार से दूर आदमी ,एक योग्य आदमी आदि ,मैं आपसे जानना चाहता हूँ कि आप जब आईना देखते हैं तो आपको क्या दिखाई देता है ??

नरेंद्र मोदी –
मुझे सीधा-साधा बस मेरी दाढ़ी दिखती है ,मेरा नाक दिखता है ,मेरी आँखें दिखती हैं एक सीधा-सरल आम इंसान जैसा होता है वैसा ही मैं दिखाई देता हूँ आईने के सामने ( हंसते हैं )
और दूसरी बात है कि मैं अंदर से कैसा हूँ ये जानने के लिए तो बहुत तपस्या करनी पड़ती है ,अपने भीतर उतरना पड़ता है और मैं बस एक सामान्य इंसान हूँ, उतना भीतर उतरने का मेरा सामर्थ्य भी नहीं है जिससे कि मैं अपने आप को पहचान पाऊं  

चेतन शर्मा –
लोग कहते हैं कि आप खलनायक नहीं ‘’ हल-नायक ‘’ हैं ,हर समस्या का ‘’ हल ‘’ बड़ी जल्दी निकाल लेते हैं 

 
नरेंद्र मोदी –
देखिये मैं मानता हूँ कि गुजरात कि जनता ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है वो जिम्मेदारी है समस्याओं का समाधान खोजना , विकास कि नई-२ ऊचाइयों को छूना , कुछ नए ढंग से जनता-जनार्दन कि आशाओं को पूर्ण करने का प्रयास करना ,तेज गति से करना ,कम समय में करना ,जल्दी से जल्दी करना ..ये सब जनता-जनार्दन ने मुझे काम दिया हुआ है और इसमें जितना ज्यादा अच्छा हो सकता है वो करने के लिए करता हूँ ,दूसरों से सीखता भी हूँ ,खुद से गलती हो जाए तो उसको ठीक भी करता हूँ और आगे चलता जाता हूँ

चेतन शर्मा –
हमारे देश में बहुत सारे मुख्यमंत्री हैं और उनको भी यही जिम्मेदारी सौंपी हुई है लेकिन आप जिस तरह से गुजरात को चलाते हैं उसे देखकर कुछ लोग समझते हैं कि आप इसे एक कम्पनी कि तरह चलाते हैं जिसमें आप एक CEO  हैं और शायद इसीलिए गुजरात जिस प्रगति कि ओर बढ़ रहा है , जिस रफ्तार से बढ़ रहा है वो इसकी एक सफलता है

नरेंद्र मोदी –
मैं मुझे एक CEO  बताए जाने के इस सिद्धांत से सहमत नहीं हूँ , CEO  जो होता है वो कम्पनी कि भलाई के लिए काम करता है ,कम्पनी का मुनाफा कैसे बढे वो उसका काम होता है लेकिन ना तो मैं गुजरात को कम्पनी मानता हूँ ना उसे कम्पनी कि तरह चलाता हूँ क्योंकि मेरे लिए गुजरात मेरा परिवार है और परिवार में एकाध कोई मेहनती सदस्य होता ही है , साढ़े पांच करोड़ गुजराती ही मेरे स्वजन हैं ,उनका सुख उनका दुःख इन सब चीजों के साथ मैं जुड़ा हुआ हूँ और इसलिए मैं खुद को CEO  नहीं बल्कि उस परिवार का एक मेहनती सदस्य मानता हूँ

 
चेतन शर्मा –
आपने रतन टाटा को नैनो कार का कारखाना गुजरात में लाने के लिए कैसे मनाया

नरेंद्र मोदी –
जब पश्चिम बंगाल में इस पर विवाद चल रहा था तब मैंने रतन टाटा जी को संदेश भेजा था कि देश का भला इसी में है कि कोई रास्ता निकाला जाए और बंगाल से ही नैनो गाडी बनकर निकलनी चाहिए वरना दुनिया में इसका बहुत गलत संदेश जाएगा और देश कि छवि को बहुत नुक्सान होगा ,लेकिन बाद में जब मुझे ये बात पता चली कि दुनिया के कई देशों से उनको ये प्रस्ताव आये हैं कि आप नैनो का कारखाना हमारे यहाँ लगाईये तब मेरे मन में चिंता हुई कि कहीं ये नैनो विदेश में ना चली जाए ,ये तो नहीं होना चाहिए ,ये कारखाना हिन्दुस्तान के बाहर तो नहीं लगना चाहिए ,जब रतन टाटा ने पक्का ही निर्णय कर लिया कि हम पश्चिम बंगाल से बाहर जा ही रहे हैं ,उनकी आधिकारिक प्रेस कोंफ्रेंस हो गई तब मैंने निर्णय किया कि ये रहनी तो हिन्दुस्तान में ही चाहिए और तब मैंने उनको बस एक SMS  किया था और उसमें मैंने सिर्फ इतना लिखा था ‘’ स्वागतम ‘’ , इससे अधिक ना मैंने उनसे कोई बात कि ना कोई चिट्ठी लिखी ,हिन्दुस्तान के कई राज्य उनको चिट्ठी लिख रहे थे ,उनके साथ मीटिंग कर रहे थे लेकिन मैंने ऐसा कुछ नहीं किया

 
चेतन शर्मा –
उस समय ये नैनो का मुद्दा थोड़ा राजनैतिक बन गया था और थोड़ा आर्थिक  

नरेंद्र मोदी –
मेरे नजरिये में बस यही था कि दुनिया में ये संदेश किसी कीमत पर नहीं जाना चाहिए कि भारत में ऐसी चीजों के लिए भी समस्याएं खड़ी हो रही हैं ,ये संदेश देश का बहुत नुक्सान करता है और मुझे इसी बात कि सबसे अधिक फ़िक्र थी

  
चेतन शर्मा –
आपके हिसाब से इन दोनों में से क्या कहना सही होगा ,गुजरात का नरेंद्र मोदी या नरेंद्र मोदी का गुजरात

नरेंद्र मोदी –
देखिये इस बात से तो इनकार नहीं किया जा सकता कि नरेंद्र मोदी गुजरात का है और इस बात से भी मैं इनकार नहीं करूँगा कि हाँ गुजरात मेरा है लेकिन मेरी तीसरी सोच है और वो है मोदी गुजरात के लिए



चेतन शर्मा –
जब से आप मुख्यमंत्री बने गुजरात के ,आपके सामने बहुत सारी चुनौतियां आई हैं ,अब तक कि सबसे बड़ी चुनौती क्या रही है आपके सामने


नरेंद्र मोदी –
चुनौतियां तो हमेशा ही आती रहती हैं ,घटनाएं घटती रहती हैं और उसके रास्ते भी निकलते रहते हैं ,मैंने हर चुनौती को एक अवसर में बदला है ,हमारे गुजरात में जब भूकम्प आया था तो मैंने उसे एक अवसर के तौर पर लिया ,भूंकप से पहले वहाँ जो इलाका था उससे और अधिक शानदार उसे बना दिया , गुजरात में बैंकिंग इंडस्ट्री में एक बारी बहुत बड़ा तूफ़ान आ गया था हम उससे बाहर निकले और कोपरेटिव बैंकिंग सेक्टर को समर्थ बना दिया ,मैं चुनौतियों कि गिनती करने वाले लोगों में से नहीं हूँ क्योंकि मैं मानता हूँ कि चुनौतियाँ के बगैर जिंदगी कि कल्पना नहीं हो सकती है जी


चेतन शर्मा –
तो इसलिए आप इसे vibrant  Gujarat   कहते हैं

नरेंद्र मोदी –
vibrant  Gujarat   एक अलग चीज है ,ये किसी सापेक्ष भाव से नहीं है , आज जिस गति से गुजरात आगे बढ़ रहा है ,जिन क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है ,जिन नई-२ चीजों को लेकर गुजरात आगे बढ़ रहा है , इससे मेरा मतलब है कि जब कोई इसे देखे तो उसे लगना चाहिए कि हाँ भई यहाँ पे एक जान है ,एक जिंदापन है, कुछ हो रहा है ,इस अर्थ में मैं कहता हूँ  vibrant  Gujarat   क्योंकि जब आप आयेंगे गुजरात में तब आप इस vibrancy  को खुद महसूस करेंगे ,आपको लगेगा कि हाँ यार कुछ तो हो रहा है और वही चीज आपको भी कुछ ना कुछ करने कि प्रेरणा देगी ,जब आप किसी अच्छी जगह पे जाते हैं तो आपका भी मन करने लगता है कि हाँ यार चलो हम भी कुछ अच्छा करें , ये माहौल हमने गुजरात में पैदा करने कि कोशिश कि है

चेतन शर्मा –
इसका श्रेय भी आपको ही जाता है क्योंकि ....

नरेंद्र मोदी –
इसका श्रेय मुझे नहीं जाता है ,इसका श्रेय गुजरात के साढ़े पांच करोड़ नागरिकों को जाता है


चेतन शर्मा –
हर सफल व्यक्ति से भी कुछ ना कुछ गलतियाँ होती हैं जिनसे वो सीखता है और अनुभवी बनता है ,आप इस बारे में कुछ बताना चाहें अपने अनुभव से

 
नरेंद्र मोदी –
जो कुछ भी नहीं करता है उससे तो कभी गलती होनी भी नहीं है , उसको तो दिक्कत आनी भी नहीं है , जो कुछ करता है उसी से गलतियाँ भी होंगी ,कमियां भी आएँगी, उसी कि आलोचना भी होगी और ये लोकतंत्र में होनी भी चाहिए , और मैं भी एक सामान्य इंसान ही हूँ ,मैं कोई किसी राजपरिवार में तो पैदा हुआ नहीं हूँ , एक बहुत ही सामान्य घर से आया इंसान हूँ

चेतन शर्मा –
कुछ लोग आप पर आरोप लगाते हैं कि आप गुजरात को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं भारत को नहीं


नरेंद्र मोदी –
आप लोगों ने अगर मुझे ठीक से स्टडी किया होगा तो आप हमेशा पायेंगे कि मेरा हमेशा से एक मंत्र रहा है और वो है – भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास , मैं जहां भी हूँ वहाँ अच्छा काम इसीलिए कर रहा हूँ ताकि वो मेरे देश के काम आए, मैं जीता हूँ तो भी देश के लिए और जब मरूँगा तब भी देश के ही लिए , मेरा कार्यक्षेत्र जरूर गुजरात है लेकिन गुजरात हमारे देश के लिए ही काम कर रहा है पाकिस्तान के लिए काम नहीं कर रहा है

चेतन शर्मा –
लेकिन अगर खाली गुजरात का ही विकास होता रहे और बाकी भारत का विकास ना हो तो

नरेंद्र मोदी –
ऐसा कौन चाहेगा , आपको क्या लगता है कि क्या मैं कभी ऐसा चाहूँगा क्या ,अरे !! मैं तो ये चाहूँगा कि बिहार मेरे गुजरात से भी आगे निकल जाए, लेकिन मुझे जब गुजरात का जिम्मा मिला है तब मैं चाहता हूँ कि मैं इतने लगन से काम करूँ कि उससे भी मेरे भारत कि सेवा हो ,मुझे जहां पर भी पूजा करने का अवसर मिला है मैं वहाँ पूजा करता रहूँगा चाहे उसका प्रसाद किसी को भी मिले


चेतन शर्मा –
क्या आप भारत का प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं

नरेंद्र मोदी –
मैं जिंदगी में हमेशा एक बात कहता आया हूँ और जिसका मैंने अपने खुद के जीवन में पालन किया है और वो ही मेरी सोच रही है कि कभी भी कुछ बनने के सपने नहीं देखने चाहियें ,कुछ करने के सपने देखने चाहिएं, मैंने कुछ बनने का सपना पहले भी कभी नहीं देखा था ,आज भी नहीं देखता और आगे भी नहीं देखूंगा , जहां भी हो जब भी हो कुछ कर दिखाने का सपना होना चाहिए , कुछ  करके दिखाऊंगा ये सपना होना चाहिए ,इसलिए बनने का सपना मेरी डिक्शनरी में ही नहीं है, हाँ कुछ करने के सपने जरूर हैं      

चेतन शर्मा –
लेकिन बहुत से लोग आज ऐसा कहते हैं कि नरेंद्र मोदी एकदम फिट उम्मीदवार हैं प्रधानमंत्री बनने के लिए  

नरेंद्र मोदी –
अब वो लोग जानें और आप मीडिया वाले जानें ,मेरा काम है बस कुछ करना और अभी जो दायित्व मुझे मिला है उसे पूरा करना

चेतन शर्मा –
लेकिन आपने अपने दायरे में सफलता हासिल कि है और लोग चाहते हैं कि ऐसा ही एक व्यक्ति देश का अगला प्रधानमंत्री होना चाहिए ,आपकी क्या राय है

नरेंद्र मोदी –
अब मैं इस पर क्या राय दूँ भई , मैं बस इतना कह सकता हूँ कि मेरा खुद लिए कोई सपना नहीं है


चेतन शर्मा –
दुनिया के दिमाग में तो है आपकी एक बहुत बड़े मंत्री कि छवि लेकिन असल में हैं आप एक कवि, मानते हैं इसे

नरेंद्र मोदी –
( हंसते हैं ) ऐसा है कि मैं खुद को कवि तो मानता नहीं हूँ , मैं बस सरस्वती माँ का साधक हूँ ,सरस्वती कि उपासना करने वाला व्यक्ति हूँ


चेतन शर्मा –
लेकिन आपने कई किताबें भी लिखी हैं ,कविताएँ भी लिखी हैं

नरेंद्र मोदी –
इसीलिए मैंने कहा कि ये सब मैं एक साधना के रूप में ही करता हूँ , कोई कवि बनने के लिए नहीं करता ( फिर हंसते हैं )

चेतन शर्मा –
किन विषयों पर लिखते हैं आप

नरेंद्र मोदी –
आमतौर पर मैं प्रकृति के ऊपर लिखता हूँ ,अपने अन्तर्रमन कि यात्राओं पर लिखता हूँ

 चेतन शर्मा –
जो भी आपके मन में है बताइए

नरेंद्र मोदी –
देखिये मैं बस प्रकृति से प्रेरणा लेता रहता हूँ , बस वही भाव कभी-२ मेरे कविता के रूप में अभिव्यक्त हो जाते हैं कि ये प्रकृति हमें क्या कुछ नहीं देती ,हम अगर इस प्रकृति से लगे रहते हैं तो हमें दुनिया से किसी और चीज कि जरूरत नहीं रहती है

चेतन शर्मा –
चार पंक्तियाँ सुनना चाहेंगे आपसे आपकी कविता कि

नरेंद्र मोदी –
( हंसते हैं ) मैंने अभी हाल ही में अपने बारे में एक कविता लिखी थी ‘’ रमता राम अकेला ‘’ के शीर्षक से ,उसमें मैंने थोड़ा अपनी दिनचर्या आदि का वर्णन किया हुआ है ,मैं कैसे रहता हूँ ,मैं कैसे घूमता हूँ आदि

चेतन शर्मा –
सुनाइये

नरेंद्र मोदी –
‘’ समीं सांझ नी वेला ,आपणी रमता राम अकेला ‘’ यानी शाम का समय हो गया है और मैं एक अकेला इंसान हूँ ,
‘’ म्हारा तन-मन में उभरे तरनेतर का मेला ‘’ यानी हमारे यहाँ गुजरात में एक तरनातर का मेला लगता है जो कि मेरे युवा मन को आंदोलित करता है 

‘’ कोई पासे नहीं लेयु देयु ‘’ यानी मुझे किसी से कुछ लेना-देना नहीं

‘’ कदे होए नहीं मारू-तेरा ‘’ यानी मेरा ,तेरा इन सब चीजों से मैं परे हूँ

‘’ आ दुनिया में जेई कई छे ते मन-गम तुम मझियारो ‘’ यानी इस दुनिया में जो कुछ भी है वो हम सबका मिलके है , ये किसी अकेले का नहीं है

‘’ रस्तो म्हारो सीधो-साधो ,नहीं भय नहीं ठेलम-ठेला ‘’ यानी मेरा बड़ा सीधा-साधा रास्ता है,ना वहाँ कोई भीड़ है, ना कोई आगे-पीछे जाने कि दौड़ है , ना कोई धक्का-मुक्की है ,बस एक सीधी-साधी जिंदगी है
 ‘’ समीं सांझ नी वेला ,आपणी रमता राम अकेला ‘’

‘’ कोई पन्थ नहीं न ही सम्प्रदाय , मानस है तो मानस ‘’ यानी ना कोई पन्थ ना कोई सम्प्रदाय , मानव है तो मानव यानी मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं हुआ करता है ये मेरे भाव हैं

‘’ उज्वाडा ने फर्क के पड़े छु कोड़ी होए के वानस ‘’ यानी उजाले के अंदर चाहे आप बड़ा दीपक जलाओ या छोटा दीपक जलाओ उससे क्या फर्क पड़ता है

‘’ जरा-जरा जुनमन नि जेवा क्यारे नहीं लटकेला , समीं सांझ नी वेला आपणी रमता राम अकेला ‘’ 

बस इस प्रकार से कभी-२ मेरे अपने भाव यूँ प्रकट हो जाते हैं ( हंसते हैं )


चेतन शर्मा –
नहीं नहीं बहुत बढ़िया , इसे सुनकर ही पता लगता है कि लोग क्यों आपके बारे में कहते हैं कि एक अकेलापन है आपके भीतर ,जिससे आपको इतनी शक्ति मिलती है ,लेकिन एक बात और आपके बारे में कही जाती है कि आप बड़े कड़क हैं ,आप बड़ी जल्दी लोगों कि छुट्टी कर देते हैं लेकिन खुद छुट्टी कभी नहीं लेते ,सुना है पिछले 7  साल से आपने एक भी दिन के लिए छुट्टी नहीं ली


नरेंद्र मोदी -  
मैंने हमेशा अपने काम को एक तपस्या के रूप में ,एक साधना के रूप में लिया है ,जब से मुख्यमंत्री बना हूँ मैंने 15 मिनट के लिए भी अवकाश नहीं लिया है और मेरा मन अभी भी इसी काम में लगा हुआ है


चेतन शर्मा –
चलिए हमने कई सवाल किये , बहुत विवाद होते हैं नरेंद्र मोदी के बारे में ,बहुत सवाल उठते हैं नरेंद्र मोदी के बारे में ,हम तो यही कह सकते हैं कि
‘’ कभी ना खत्म होगी शाम इन बहसों कि , भारत को आज जरूरत है नरेंद्र मोदी जैसों की ‘’
मोदी साहब बहुत-२ शुक्रिया आपका हमसे बात करने के लिए

नरेंद्र मोदी –
बहुत-२ धन्यवाद भैया

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