राजदीप सरदेसाई –
मैं यहाँ मौजूद लोगों
को बताना चाहूँगा कि ये केवल और केवल एक संयोग ही है कि आज मोदी जी ने और मैंने भी
,आज
हम दोनों एकसाथ हैं और हम दोनों ने ही भगवा रंग के वस्त्र पहने हुए हैं
( सभा में इस पर ठहाका गूंजता है , राजदीप आगे बोलता है )
इससे ये भी साबित होता
है कि किसी भी रंग पर किसी एक विचारधारा का ही एकाधिकार नहीं हो सकता है ,खैर छोडिये हम किसी और दिन
इस पर बहस करेंगे
आज हम यहाँ पर हैं नरेंद्र
मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के लिए और हम यहाँ उनका हमारे बीच में हार्दिक स्वागत करते
हैं , नरेंद्र
मोदी एक ऐसे राजनेता हैं जो कि अपने आप में एक अबूझ पहेली कि तरह हैं , नरेंद्र मोदी के समर्थक
उन्हें अपना आदर्श मानते हैं , उनका अनुसरण करना चाहते हैं और कहते हैं कि आज मोदी ही गुजरात
हैं , नरेंद्र मोदी के विरोधी
उन्हें साम्प्रदायिक राजनीति का प्रतीक मानते हैं लेकिन एक बात उनके समर्थक भी मानते
हैं और विरोधी भी कि आप नरेंद्र मोदी को चाहे पसंद करें या नापसंद करें लेकिन आप उन्हें
नजरअंदाज नहीं कर सकते
अभी मोदी जी आप सबके सामने
आज के विषय ‘’ क्षेत्रीयता
का गौरव बनाम राष्ट्रीय पहचान ‘’ पर अपने विचार रखेंगे , मोदी जी उन मुख्यमंत्रियों
में से हैं जो कि आज खुद अपने आप में एक बहुत बड़ा ब्रैंड बन चुके हैं यहाँ तक कि अपनी
पार्टी से भी बड़े बन चुके हैं , तो मैं मोदी जी से अब प्रार्थना करूँगा कि वे आज के विषय
पर अपने विचार रखें
नरेंद्र मोदी –
राजदीप को अपनी TRP का डर लग रहा है और इसलिए उसने अपने शब्दों से पहले ही मेरे
और उसके बीच में एक दिवार बना दी कि आज उसके द्वारा पहने हुए भगवा रंग के कुर्ते का
उसकी विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है
(सभा में फिर से ठहाका गूंजता है ,नरेंद्र मोदी आगे बोलते हैं
)
लेकिन मैं तो खुद हैरान
हूँ और मुझे पता नहीं था कि मैं अहमदाबाद से निकलूंगा इस चर्चा में भाग लेने के लिए
और मेरा इतना असर हो जाएगा राजदीप के ऊपर कि वो भी मेरी तरह भगवा रंग के कपडे धारण
कर लेगा
(सभा में फिर से ठहाका गूंजता है ,इसके बाद नरेंद्र मोदी चर्चा
के विषय पर एक काफी लंबी और प्रेरणादायक स्पीच देते हैं जिसे कि आप सब YOUTUBE पर जाकर देख सकते हैं )
( उसके बाद जैसे ही नरेंद्र मोदी अपनी स्पीच खत्म करके अपनी
कुर्सी पर बैठते हैं तो राजदीप कहता है )
राजदीप सरदेसाई –
इससे पहले कि हम नरेंद्र
मोदी के साथ प्रश्न-उत्तर का सम्वाद शुरू करें मैं मोदी जी से बस एक बात पूछना
चाहता हूँ कि मोदी जी अगर आप 2002 के बाद हुई
हिन्दुस्तान समिट में आये होते तो क्या आप वही स्पीच देते जो आपने आज दी है या फिर
आप स्पीच देते गोधरा पर ,आतंकवाद पर ,मियाँ मुशर्रफ़ पर क्योंकि आज आपने बात कि है गाँधी पर ,गुजरात कि विकास-यात्रा पर
,देश
में पानी कि समस्या के समाधान इत्यादि पर तो इसलिए मुझे समझ में नहीं आ रहा कि क्या
नरेंद्र मोदी बदल गए हैं या गुजरात में आज स्तिथि बदल गई है या दुनिया बदल गई है ??
नरेंद्र मोदी –
कपड़ों से तो लगता है राजदीप
बदल गया है
( सारी सभा एक जोरदार ठहाके से गूंज उठती है और कुछ तालियाँ
भी बजती हैं )
राजदीप सरदेसाई –
मोदी जी लेकिन फिर भी
मैं जानना चाहता हूँ कि कहीं तो बदलाव आया है क्योंकि जो मुद्दे आप आज से 5 साल पहले उठाते थे आज आप वो मुद्दे नहीं उठाते हैं ,क्या आपको लगता है कि क्योंकि
आज आप एक मुख्यमंत्री बन गए हैं ,आपने सरकार चलाई है तो आपको समझ में आया है कि जनता का विकास
करना जरूरी है ना कि इन भावनात्मक मुद्दों को छेड़ना, क्या इस कारण आपको अपने
अंदर बदलाव लाना पड़ा है या फिर राजनातिक हकीकत समझ में आने के कारण आपको भी समझौता
करना पड़ा है ??
नरेंद्र मोदी –
हो सकता है कि जिन लोगों
ने भी पहले मेरे खिलाफ इस प्रकार कि झूठी चीजें फैलाई हैं उनमें अभी तक वो हिम्मत नहीं
आई होगी मेरे सत्य स्वरूप को स्वीकारने कि ,हो सकता है और अगले 5 साल
बाद उनमें वो हिम्मत आ जाए और इसलिए मैं उस समय का इन्तेजार करूँगा
राजदीप सरदेसाई –
लेकिन मोदी जी आपके बारे
में मीडिया में एक धारण तो है ,खासकर उस अंग्रेजी मीडिया में जिसे कि आप खुद कई बार सबसे
ज्यादा अपने निशाने पर लेते हैं और जो कि आपको नफरत का नायक , हिंदुओं का हीरो इत्यादि
बताती है और वीर संघवी नामक पत्रकार ने तो आपको हत्यारा तक कहा था अपने एक लेख में
, तो
ऐसे लोगों को आप क्या कहना चाहेंगे ??
( वैसे यहाँ पर पाठकों को बताना जाना जरूरी है कि वीर संघवी
उन पत्रकारों में से एक हैं जिनका अभी हाल ही मैं पर्दाफाश हुआ है खान्ग्रेस कि दलाली
करते हुए नीरा राडिया कांड वाली टैप्स में )
नरेंद्र मोदी –
जिन लोगों ने भी मेरे
लिए ये सब कहा है मैं उन सभी मित्रों को प्रणाम करता हूँ ,उनका आदर करता हूँ और ईश्वर
से प्रार्थना करता हूँ कि उन लोगों कि और मेरी मित्रता बरकरार रखने कि मुझे ताकत दे
,उनसे
मेरी बहुत अच्छी दोस्ती बने और मैं मानता हूँ कि सही समय आने पर सत्य सबके सामने आएगा
और हर कोई उसे समझेगा
राजदीप सरदेसाई –
मोदी जी लेकिन फिर भी
मैं आपसे जानना चाहता हूँ ,आपको देश-विदेश में भी आज काफी लोकप्रियता प्राप्त हुई है ,यहाँ तक चीन तक के अखबारों
ने आपकी काबिलियत कि प्रशंसा कि है परन्तु इस सबके बावजूद क्या आपको नहीं लगता कि आपसे
जुड़ा हुआ 2002 वाल
इतिहास आज भी आपको परेशान करता है , आप आज यहाँ मौजूद सभा के सामने क्यों नहीं हमेशा के लिए ये
साफ़ कर देते हैं कि 2002 में जो भी हुआ उसका आपको बेहद अफ़सोस है और आप उससे आगे बढ़ना
चाहते हैं ताकि आगे चलके कोई भी आप पर उस बारे में सवाल ना उठाये
नरेंद्र मोदी
इस बारे में मुझ पर फैसला
मैंने मेरे गुजरात कि जनता पर छोड़ दिया है , मेरे लिए मेरे गुजरात
कि जनता से बड़ा कोई नहीं है और उस जनता ने बार-२ इस पर अपना
फैसला सुनाया है और मैं आप सब मीडियावालों को आमंत्रित करता हूँ कि प्लीज गुजरात में
आइये ,मेरे
खिलाफ जो भी अजेंडा आप चलाना चाहते हैं प्लीज उसे चलाइए , वहाँ पे मेरे खिलाफ अपनी
पूरी मेहनत कीजिये और मेरे लिए उनका जो भी फैसला होगा मुझे मंजूर होगा क्योंकि मेरे
लिए मेरे गुजरात कि जनता ही भगवान है ,मैं उन्हीं को जवाबदेह हूँ और मैं उन्हें जवाब देता रहता
हूँ
राजदीप सरदेसाई –
तो मोदी जी आपको लगता
है कि अगर जनता आपको बार-२ चुनाव जीताती रहती है तो आप हमेशा सही ही होंगे , क्या आपको नहीं लगता कि
इसमें नैतिकता का भी कुछ स्थान होना चाहिए ??
नरेंद्र मोदी –
ये आपको तय करना है कि
आप जनता के निर्णय को स्वीकार करते हैं या अपने पुराने घिसे-पिटे विचारों
को पकड़कर रखते हैं ये सब आप पर निर्भर करता है ,मैंने अपना बता दिया कि मुझ
नरेंद्र मोदी के लिए मेरे गुजरात कि जनता का निर्णय ही अंतिम निर्णय होता है
राजदीप सरदेसाई –
लेकिन मोदी जी क्या आप
ऐसा कह सकते हैं कि गुजरात में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसे आपसे कोई भी समस्या
ना हो , उदहारण
के तौर पर मान लीजिए कि अगर 10 % लोगों
को भी आपकी एक इस अलग तरह कि शख्सियत से समस्या है तो क्या आपको नहीं लगता कि एक मुख्यमंत्री
होने के नाते आपको उन 10 % लोगों
के पास भी जाना चाहिए और उन्हें समझाना चाहिए कि देखिये मेरा अजेंडा सिर्फ विकास का
है ना कि साम्प्रदायिक राजनीती का और मैं 2002 के
लिए आपसे माफ़ी मांगता हूँ ,क्या आपको नहीं लगता कि आपको ऐसा करना चाहिए ??
नरेंद्र मोदी –
पहली बात तो हिन्दुस्तान
टाइम्स ने आज चर्चा का जो विषय तय किया था और जिसके लिए यहाँ मुझे बुलाया गया था उस
विषय से बाहर जाकर एक व्यक्ति जिसको बस एंकर बनने का मौका चाहिए वो मुझ पर अपना अजेंडा
थोपने कि कोशिश कर रहा है तो मैं चाहूँगा कि हिंदुस्तान टाइम्स कि ये शोभना भारती जी
तय करें कि आगे से कैसे एंकरों को बुलाना चाहिए
दूसरी बात अब आपके सवाल
पर मैं आता हूँ , मैं जब कहता हूँ कि मैंने गुजरात के सभी 18 हजार गाँवों तक में 24 घंटे 3-Phased Uninterupted Power Supply ( यानी
बिना किसी कट के निर्बाध बिजली )
पहुंचाई तो अब मैं आपसे जानना
चाहता हूँ कि आपके भीतर वो कौन सी घटिया चीजें घुस गई हैं कि आप उस 100 % में
भी 90%-10% को खोजना शुरू कर देते हैं , वो कौन सी विकृतियाँ आपके
अंदर घुस गई हैं जो पूर्ण नहीं देख पाती हैं ,आपको थोड़ा अपने अंदर झांकना
चाहिए कि वो कौन सी नेगटिव चीजें आपके अंदर घुसी हुई हैं जो कि देश को तबाही कि ओर
ले जा रही हैं
(सारा हॉल तालियों से गूंज उठता है ,नरेंद्र मोदी आगे बोलते हैं
)
अगर मैं साबरमती के अंदर
नर्मदा का पानी पहुंचाता हूँ और इसके कारण अगर मेरे अहमदाबाद शहर के पानी में फ्लोराइड
कि मात्रा में कमी आती है और एक अच्छा पानी मेरे अहमदाबाद के नागरिकों को मिलता है
तो ये क्या जरूरत है कि इतने %
को ये मिलता है और दूसरे % को ये मिलता
है ,अरे
सारे शहर को मिलता है भई, ये भाषा अगर मैं बोलता हूँ तो आपको परेशानी क्यों होती है
?? इन
सवालों का जवाब आपको अपने अंदर ढूंढना होगा कि और आपके खुद के अंदर ये दम होना चाहिए
अपनी इस बुरी सोच से बाहर आने का ,और कितने सालों तक आप जैसे लोग देश को इन बुराइयों में जकड़कर
रख पाओगे राजदीप जी , मैं कहता हूँ ज्यादा समय तक नहीं रख पाओगे
राजदीप सरदेसाई –
तो मोदी जी इसका मतलब
आप कह रहे हैं कि आज देश इतना परिपक्व हो गया है कि वो अब नकारात्मक चीजों से आगे विकास
कि राजनीती कि और बढ़ना चाहता है
नरेंद्र मोदी –
मैं देश को सलाह देने
कि क्षमता नहीं रखता हूँ ,मैं बीजेपी का एक बहुत छोटा कार्यकर्ता भर हूँ , मैं जहाँ हूँ और जो मैं
काम कर रहा हूँ मैं बस उस बारे में बोल रहा हूँ कि भैया मैं ये कर रहा हूँ
राजदीप सरदेसाई –
चलिए ठीक है कार्यक्रम
को आगे बढाते हैं ,एक बात तो मुझे भी माननी पड़ेगी कि आज विकास के विभिन्न मानकों
पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गुजरात बाकी राज्यों से कहीं आगे पहुँच गया है ,तो वो नरेंद्र मोदी का कौन
सा मंत्र है जो कि सफल हो रहा है गुजरात में ,सारे सर्वे ये बता रहे हैं
कि चुनावों में लोग नरेंद्र मोदी को ही चुनना चाहते हैं ,तो हम जानेंगे कि नरेंद्र मोदी
में वो क्या खासियत है कि उनकी इतनी आलोचना होने के बाद भी लोग नरेंद्र मोदी को ही
पसंद करते हैं
नरेंद्र मोदी –
देखिये लोकतंत्र में आलोचना
का हमेशा स्वागत होना चाहिए ,मेरी अगर किसी बात को लेकर आलोचना होती है तो मैं उसका भी
स्वागत करता हूँ लेकिन मैं आरोप लगाने के खिलाफ हूँ ,आपको आलोचना और आरोप में फर्क
समझना होगा , इस
दुनिया में कोई ये दावा नहीं कर सकता है कि वो PERFECT है , इसलिए आलोचना का तो मैं हमेशा से समर्थक रहा हूँ और लोकतंत्र
में आलोचना होनी ही चाहिए लेकिन ये आरोप लगाने का जो अजेंडा होता है इसके मैं खिलाफ
हूँ
राजदीप सरदेसाई –
लेकिन सर क्या आप उस आलोचना
से कुछ सीखते हैं और अपने अंदर उसके अनुसार बदलाव लाते हैं ??
नरेंद्र मोदी –
अब मैं सीखता हूँ या नहीं
सीखता हूँ इसका निर्णय मैं राजदीप सरदेसाई पर ही छोड़ता हूँ कि वो अपनी टीम लेकर गुजरात
आये और अपना विश्लेषण करके खुद निर्णय करे
( उसके बाद कार्यक्रम में मोजूद सुहैल सेठ ने मोदी जी से पहला
प्रश्न किया )
सुहैल सेठ –
इस समिट का मुख्य विषय
है उस भारत कि कल्पना जो कि भविष्य में हो सकता है और मैंने आपकी पूरी स्पीच सुनी आपने
एक बार भी धर्म का या हिन्दुव इत्यादि का नाम नहीं लिया ,तो क्या अब हम ये कह सकते हैं
कि आगे चलके चाहे भाजपा हो और या कोंग्रेस हो या कोई भी अन्य पार्टी हो ,उन सबको सिर्फ विकास के मुद्दे
पर ही ध्यान देना होगा क्योंकि अभी भी कुछ ताकते हैं जो कि धर्म ,हिंदुत्व इत्यादि कि बात करती
हैं तो क्या आपको लगता है कि इस सबका आगे जाके आने वाले भारत में कोई महत्व नहीं होगा
??
नरेंद्र मोदी –
खुद महात्मा गाँधी ने
भारत में राम-राज्य कि इच्छा कि थी और मुझे लगता है कि महात्मा गाँधी का
आज भी महत्व है और इसीलिए मेरे लिए विकास और हिंदुत्व ,इन दोनों बातों का महत्व है
( राम का नाम सुनते ही राजदीप सरदेसाई को मिर्ची लग गई और वो
लौट आया अपने पुराने एजेंडे पर )
राजदीप सरदेसाई –
राम-राज्य से
आपका मतलब क्या है ,कृपा करके आप हमें राम-राज्य कि
परिभाषा समझाएं कि क्या है ये राम-राज्य ??
नरेंद्र मोदी –
महात्मा गाँधी ने जिस
राम-राज्य कि कल्पना कि थी और अगर उसे आसान भाषा में आप जानना
चाहते हैं तो उसका मतलब है सुखी,समृद्ध और विकसित राज्य और मैं मानता हूँ कि इस राम-राज्य शब्द
का प्रयोग खुद महात्मा गाँधी के मन में से निकलना ,वो अपने आप में आपको एक बहुत
ही बड़ा और साफ़ समझने वाला संकेत देता है और मुझे तो लगता है कि जब से हम वहाँ से हट
रहे हैं तभी से ये सब वर्तमान कि बुराइयां हमारे समाज में आनी शुरू हो गई हैं
( इसके बाद सवाल पूछने कि बारी आई कोंग्रेसी राजीव शुक्ला कि
, उसके
माइक पकड़ते ही मोदी जी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि ये राजिव शुक्ला ना तो बोलिंग करता
है ,ना
ही बैटिंग करता है ,ना ही फिल्डिंग करता है और ना ही एम्पायरिंग करता है फिर
भी क्रिकेट में है )
राजीव शुक्ला –
मोदी जी मैंने आपकी पूरी
स्पीच सुनी और उसमें आपने महात्मा गाँधी और सरदार पटेल कि नीति पर चलने का बल दिया
,तो
क्या आपको नहीं लगता कि आपको भी गाँधी जी कि ही तरह सारे समाज को अपने साथ जोड़कर चलना
चाहिए,किसी
एक पक्ष को अलग नहीं रखना चाहिए और मेरे खैयाल से तो शायद अगर आज गाँधी जी जीवित होते
तो आपके खिलाफ कबके भूख-हड़ताल पर बैठ गए होते
नरेंद्र मोदी –
मेरे लिए ये बहुत ही बड़े
दुःख कि बात है कि राजीव शुक्ला कोंग्रेस में है और फिर भी उसको गांधी जी के बारे में
कुछ ज्ञान ही नहीं है , आपने अभी गाँधी का वर्णन करते हुए जिस सवाल को अपना आधार
बनाया वो करने से पहले आप एक बारी सुभाष बाबू और महात्मा गाँधी के सम्बन्धों का प्रकरण
पढ़ लीजिए ,आपको
अपने उस सवाल का जवाब मिल जाएगा जो आपने मुझसे पूछा है
राजदीप सरदेसाई –
मोदी जी हम ये जानना चाहते
हैं कि महात्मा गांधी के बारे में आपके क्या विचार हैं ??
नरेंद्र मोदी –
मैं तो आज भी मानता हूँ
कि महात्मा गाँधी का जो ग्राम-स्वराज्य का सपना था वो आज भी देश में लागू किया जाना उतना
ही जरूरी है जितना कल था , गाँवों में विकास किस प्रकार से होना चाहिए ये जो मॉडल उन्होंने
रखा था वो सबसे बढ़िया था
मैं आप सबको एक छोटा सा
उदहारण बताता हूँ जब मैं छोटा था तो मेरे गाँव में आचार्य विनोबा भावे जी के माध्यमों
से बहुत अच्छा कार्य किया जा रहा था ,तो एक बहुत ही निष्ठावान गांधीवादी श्री द्वारिका दास जोशी
जी थे जिनकी आयु आज तो 90 साल से ऊपर हो चुकी है और जिनके ढेरों आशीर्वाद मुझे मिले
हैं मेरे जीवन में
तो उन्होनें एक बारी मुझसे
कहा था कि जब केन्द्र के चुनाव होते हैं या राज्य के चुनाव होते हैं तो देश को उतना
नुक्सान नहीं होता है जितना नुक्सान गाँव के पंचायत के चुनाव के समय होता है क्योंकि
उस समय सारा का सारा गाँव आपस में बिखर जाता है ,एक दूसरे को मारने-काटने पर
उतारू हो जाता है ,तो क्यों ना हम गाँवों में unanimous चुनावों का माहौल बनाएँ ,ये सपना मैंने उनसे अपने बचपन
में सुना था
मैं जब पहली बार मुख्यमंत्री
बना था 2001 में तो उस समय मेरे यहाँ 11 हजार
पंचायतों के चुनाव होने वाले थे ,तो उनके लिए मैंने एक घोषणा कि थी कि जो भी गाँव अपने यहाँ
मिलकर और एकमत होकर unanimous election
के जरिये अपना निर्णय करेगा
तो उनको मेरी सरकार 1 लाख रुपैया
देगी , और
मुझे बहुत खुशी है आपको बताते हुए कि इसका परिणाम ये हुआ कि आज मेरे गुजरात में लगभग
45 % इलाके ऐसे हैं जहाँ पर unanimous election के
जरिये फैसला होता है और उससे जो BODY चुनकर
आती है वो फिर केवल बहुमत के प्रति नहीं बल्कि पूरे गाँव के प्रति वफादार रहती है और
उससे आज गाँवों के अंदर विकास के लिए एक सर्वसम्मति के माहौल का निर्माण हुआ है , तो अब ये कोई मेरा नहीं
मूलतः गांधी जी का विचार है जिनसे प्रेरणा लेकर मैंने इस काम को किया है
( इसके बाद सवाल पूछने कि बारी आई मधु त्रेहान कि )
मधु त्रेहान –
आपके साथ हो रहे इन सारे
सवालों में एक background music कि तरह चल रहा है
2002 में
हुए दंगो का जिक्र , मैं
आपसे ये जानना चाहती हूँ कि जिस प्रकार का भारत आप बनाना चाहते हैं क्या उसमें मुसलामानों
के लिए कोई जगह है कि नहीं और या फिर आप सिर्फ वैसा भारत बनाना चाहते हैं जो कि पूरी
तरह से हिंदू हो यानी कि एक हिंदू राष्ट्र
??
नरेंद्र मोदी –
ये सवाल सिर्फ उन लोगों
कि समस्या है जो कि हिंदू और हिंदुत्व को जानते नहीं हैं , अब देखिये हिंदुत्व कि
विचारधारा क्या है ,हिंदुत्व कहता है एकमसत् विप्राः बहुधा वधंती यानी सत्य एक
है बस उसको जानने ,जताने ,कहने के रास्ते अलग-२ हो सकते
हैं
Israel के
यहूदियों कि एक official book है उसमें उन्होनें कहा है कि कोई ये ना समझे कि हम पर सिर्फ
जर्मनी में ही अत्याचार हुए थे ,हमारे ढाई हजार सालों में हम दुनिया में जहाँ भी गए हर जाती
ने हर धर्म ने हम पर अत्याचार किये लेकिन अगर कोई अपवाद था तो वो अकेला हिंदू राजाओं
के शासन वाला हिन्दुस्तान था जहाँ पर हमें कभी कोई कष्ट नहीं दिया गया
एक और उदहारण आपको देता
हूँ ,जब
पारसी आये हिन्दुस्तान में तब वो सबसे पहले गुजरात के किनारे पर आये थे ,उस समय हिन्दुस्तान में हिंदू
राजाओं का शासन था , तो उस समय उन पारसियों ने हिंदू राजा से प्रार्थना कि थी
कि हम आपके यहाँ आये हैं लेकिन हमारी एक धार्मिक रीति ऐसी है कि हमारी एक पवित्र वस्तु
को जब हम रखेंगे तो उसकी 50 KM कि RANGE में
कोई भी गैर-ईरानी नहीं आना चाहिए , अब आप देखिये कि राजा
हिंदू ,देश
हिंदू ,व्यवस्था
हिंदू और मांग कि गई Anti-हिंदू , लेकिन ये देश ऐसा है कि यहाँ के हिंदू ने कहा था कि आप चिंता
मत कीजिये मैं ऐसी व्यवस्था कर दूँगा कि आपके उस दायरे में कोई भी प्रवेश नहीं करेगा
और हम आपकी धार्मिक मान्यता का पूरा आदर करेंगे
आज जो ये आतंकवाद कि समस्या
से सारी दुनिया जूझ रही है और उसमें जो ये इमोशनल ब्लैकमेलिंग चल रही है और उसमें जो
एक खास मजहब का उपयोग हो रहा है जो कि ये मानता है कि तेरे धर्म से मेरा धर्म ऊँचा
है ,जब
इस प्रकार का भाव जगेगा तो संघर्ष कि स्तिथि उत्पन्न होगी ही और वो संघर्ष आतंकवाद
कि सीमा तक चला जाता है
एक बात याद रखिये कि ये
हिंदू ही हैं जो कि सर्वसमावेशक हैं और जो कहते हैं कि आप जिस भी भगवान ,ईश्वर ,अल्लाह आदि को मानते हैं पूरे
विश्वास से मानिए आपको निश्चित ही परमात्मा कि प्राप्ति होगी ,आप जिस भी किताब को मानते हैं
पूरे विश्वास से मानिए निश्चित ही आपको परमात्मा कि प्राप्ति होगी ,ये है मूलतः हिंदू और हिंदुत्व
कि विचारधारा , लेकिन अगर कोई मजहब इसे ना मानकर इस पर ही सवाल उठाना शुरू
कर दे कि नहीं साहब केवल मेरी ही किताब सही है ,मेरा ही मजहब सबसे ऊँचा है
तब मुझे लगता है कि समस्या पैदा होती है
( इसके बाद सवाल पूछने कि बारी आई कोंग्रेस के मंत्री सलमान
खुर्शीद कि बीवी लुईस खुर्शीद कि )
लुईस खुर्शीद –
मोदी जी यहाँ मौजूद बहुत
से लोगों को ये लगता है कि जो भी 2002 में गुजरात में हुआ था वो बेहद शर्मनाक था लेकिन आपको ऐसा
नहीं लगता क्योंकि आपके मुताबिक़ गुजरात के लोगों ने बार-२ आपको ही
चुना है गुजरात के लिए ,तो मैं आपसे जानना चाहती हूँ कि 100 % में से कितने %
लोगों ने आपको और आपकी पार्टी
को वोट दिया ताकि ये पता चले कि सही मायनों में कितने % लोग आपकी
विचारधारा से सहमत हैं और कितने %
नहीं हैं , अगर 45 % लोगों ने आपके लिए वोट किया तो इससे क्या ये साबित नहीं होता
कि बाकी का 55 % गुजरात आपसे बिलकुल भी सहमत नहीं है ??
नरेंद्र मोदी –
आज हिन्दुस्तान में केन्द्र
में जो ये कोंग्रेस कि सरकार बैठी है ना वो भी उसी प्रकार से और उतने ही % से आई है
जिस पर कि आप मुझ पर सवाल उठा रही हैं , जिस लोजिक से आप मुझसे सवाल पूछ रही हैं उसी लोजिक से ही
मैं आपको जवाब दूँगा , अब आपके मन के मुताबिक़ तो मैं जवाब देने वाला नहीं , आप जरा हिन्दुस्तान का
लोकतंत्र देखिये कि ये कैसे चल रहा है ,इस देश में जो 100 % मतदाता हैं उसमें से केवल 50 % ही वोट डालते हैं और उन 50 % में से जो 26 % ले
आता है वो सारे के सारे 100 % पे
राज करता है ,अब ये हमारा डेमोक्रेटिक सिस्टम बनाया गया है तो इसमें क्या
मेरी गलती है और आपके खुर्शीद जी भी इसी सिस्टम से और इसी % से चुने गए
हैं
Mr.Gupta-
मोदी जी मुझे आपसे ये
शिकायत है कि जब गुजरात और भारत के दो सपूत इरफ़ान पठान और युसूफ पठान भारत के लिए साउथ-अफ्रीका से
वल्ड कप जीतकर लाये तो आपको उन्हें सम्मानित करने में पांच दिन क्यों लगे ??
नरेंद्र मोदी –
पहली बात तो ये है कि
आपको ना तो सही date का
ज्ञान है और ना ही सही समाचार का ज्ञान है , बल्कि ये तो मुझे आपसे
शिकायत है कि आप इतना सोये हुए थे कि आपको पांच दिन बाद ये खबर मिली कि मैंने उन्हें
सम्मानित किया है , ये बहुत बड़ा दुर्भाग्य है इस देश में और इसलिए मैं आपसे कहना
चाहता हूँ कि जिस स्त्रोत से या जिस चैनल से या जिस अखबार से आपको खबरें मिलती हैं
ना जरा उसकी जांच कर लिया कीजिये कि वो सही है या नहीं
और दूसरी बात ये है कि
कोई ईनाम दे या ना दे लेकिन क्या इसके आधार पर मूल्यांकन होगा क्या देश कि प्रतिभा
का ??, क्या
अब मीडिया ये अजेंडा तय करेगा कि किस मिनट में क्या करना है ??
और मैं आपसे पूछना चाहता
हूँ कि जब हमारे खेल में हमारे खिलाड़ियों ने पाकिस्तान को पराजित किया तो उस पर अगर
उनके लिए ईनाम हो ,सम्मान हो आदि हो तो उससे मुझे कोई आपत्ति नहीं है लेकिन
अयोध्या के अंदर जब भगवान श्री राम के मंदिर पर हमला हुआ था तो उस समय हमला करने वाले
पाकिस्तानि आतंकवादियों को मेरे सेना के जवानों ने मौत के घाट उतार दिया था तब उस समय
के उत्तर-प्रदेश के जो मुख्यमंत्री थे ( मुलायम सिंह
यादव ) उनसे क्या आजतक भी आपने या किसी ने भी कभी पूछा कि अपनी जान
दांव पर लगाने वाले किसी जवान को उन्होनें कोई भी ईनाम या सम्मान क्यों नहीं दिया था
??
अरे जो क्रिकेट के मैदान
में जीतकर आते हैं उनका निश्चित रूप से सम्मान हो लेकिन फिर सवाल ये भी तो उठेगा कि
जिन्होनें युद्ध के मैदान अपना जीवन दिया है इस देश के लिए उनके सम्मान के बारे में
कभी कोई सोचता है क्या इस देश में ,उनका उचित सम्मान कब होगा
राजदीप सरदेसाई –
एक बात तो माननी पड़ेगी
मोदी जी आपके बारे में कि सालों पहले जो ईंट का जवाब पत्थर से देने का आपका स्वभाव
था वो आज भी वैसा का वैसा है ,उसमें आपके अंदर कुछ भी बदलाव दिखाई नहीं देता लेकिन मैं
आपसे एक बात जानना चाहता हूँ कि क्या आप अपने आपको भारत के अगले प्रधानमंत्री के रूप
में देखते हैं और क्या वो ही आपका अगला लक्ष्य है ??
नरेंद्र मोदी –
ये तो पूरा सवाल ही बेमतलब
का है ,मैं
मूलतः संगठन से जुड़ा व्यक्ति रहा हूँ और मैंने कभी कोलैज तक का चुनाव नहीं लड़ा था ,अचानक मेरे ऊपर गुजरात का ये
दायित्व आ गया तो मेरी बस कोशिश ये रहती है कि मुझे जो ये काम मिला है और भगवान ने
मुझे जितनी भी बुद्धि , शक्ति दी है उसको पूरी तरह से इसमें झोंक कर मैं मेरे राज्य
कि भलाई के लिए काम करूँ
ना ही मेरा और कोई लक्ष्य
है और ना ही मेरा और कोई अजेंडा है ,मेरा सिर्फ एक ही अजेंडा है कि मेरे गुजरात का भला हो ,मेरा गुजरात देश के काम आये
,शायद
अब जो मैं कहने जा रहा हूँ वो आप सबके गले नहीं उतरेगा लेकिन जिस प्रकार से कोई किसी
परमात्मा कि भक्ति में ,पूजा इत्यादि में लीन हो जाता है उसी प्रकार मुझे गुजरात
के अलावा और कुछ दिखाई नहीं देता है ,इसे आप एक प्रकार से मेरा पागलपन कह सकते हैं लेकिन मुझे
इससे प्रेम है क्योंकि मेरा ये पागलपन ही है जो मुझे दिन-रात मेरे
गुजरात कि भलाई करने में लगाए रखता है और मैं चाहूँगा कि आप सभी भी मेरे इस पागलपन
को बरकरार रखने में मेरी मदद करें
राजदीप सरदेसाई –
इसमें गुजरात पूजा है
या व्यक्ति पूजा है मोदी जी ,क्योंकि गुजरात में आज कुछ भी अच्छा काम अगर होता है तो वहाँ
के लोग इसे आपसे जोड़ देते हैं कि ये सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी कि ही वजह से हुआ
है ,क्या
ये गलत बात नहीं है ??
नरेंद्र मोदी –
अगर हर चीज के लिए मुझे
इतनी गालियाँ आप मीडियावाले मित्रों ने ना दी होतीं तो शायद आज गुजरात में ये स्तिथि
पैदा ना होती ,और मैं तो मानता हूँ कि दोनों ही चीजें सही नहीं हैं ,किसी इंसान को इतना अधिक बदनाम
भी नहीं किया जाना चाहिए जितना आप लोगों ने मुझे किया है और किसी व्यक्ति को इतना ज्यादा
श्रेय भी नहीं दिया जाना चाहिए जितना कि गुजरात में मुझे दिया जाता है
राजदीप सरदेसाई –
लेकिन मोदी सर आपकी गुजरात
कि सरकार कि सबसे बड़ी आलोचना यही होती है कि ये सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी एक व्यक्ति
के ऊपर ही निर्भर होकर चलती है, क्या आपको नहीं लगता कि आपको सरकार चलाने के साथ-२ ऐसे सिस्टम
भी बनाने चाहिए जो कि नरेंद्र मोदी के बाद भी कायम रहें और वैसी ही कुशलता और कामयाबी
से काम करें जैसे कि नरेंद्र मोदी करते हैं
नरेंद्र मोदी –
मैं आपसे पूछना चाहता
हूँ अगर मैं मेरे राज्य में evening courts
कि व्यवस्था करता हूँ तो क्या
ये एक सिस्टम का निर्माण नहीं है ?? अगर मैं मेरे राज्य में ज्योतिग्राम नाम कि योजना बनाता हूँ
और उसे अच्छे से लागू करता हूँ तो क्या ये एक सिस्टम का निर्माण नहीं है ?? अगर मैं लड़कियों को अधिक से अधिक पढाने के लिए 700 लोगों एक पूरी टीम बनाकर
उन्हें गाँवों में ले जाकर एक अभियान चलाता हूँ तो क्या ये मैं एक नए सिस्टम का निर्माण
नहीं करता हूँ ?? लेकिन अगर आप मीडियावालों के पास इसे देखने का ,समझने का समय नहीं है और आपको
मेरे बारे में बस एक ‘’ चलती का नाम गाड़ी ‘’ लिखने कि आदत है तो उसको
हर बारी जवाब देने के लिए मैं अपना टाइम क्यों खराब करूँ भैया ,आप अपने एजेंडे पर चलते रहिये
आप अपना काम करते रहिये मैं अपना काम करता रहूँगा

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